
संवाददाता ( आदर्श सिंह )
नई दिल्ली: प्रतिद्वंद्वी गैंग के मेंबरों से जान के खतरे की आशंका जताने पर पटियाला हाउस कोर्ट ने गैंगस्टर हाशिम बाबा की जेल शिफ्ट करने का ऑर्डर दिया था। सरकार इसके खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची, जिसने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी। जेल प्रशासन ने हाई कोर्ट को बताया कि सेंट्रल जेल-2 के हाई सिक्योरिटी वॉर्ड के चार ब्लॉक में 12 सेल हैं। हर कोठरी में सिर्फ एक कैदी रहता है। बाबा को तभी सेल से बाहर निकाला जाता है, जब उसके प्रतिद्वंद्वी अपनी-अपनी सेल में बंद हों। इसलिए मौजूदा जेल में उसकी जान को खतरा नहीं है।
- सरकारी वकील ने हाई कोर्ट को बताया कि जेल प्रशासन के पास कैदी की सुरक्षा को लेकर अहम इनपुट थे।
- जान को खतरे की आशंका को देखते हुए ही इसे तिहाड़ की सेंट्रल जेल-1 से 2 में शिफ्ट किया गया।
- बाबा कई गंभीर मामलों में ट्रायल का सामना कर रहा है, जिनमें महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के मामले भी हैं। ऐसे में उसके लिए सेंट्रल जेल-2 में लगे पावरफुल जैमर और वहां का बेहतर सिक्योरिटी लेआउट जरूरी हैं।
- दूसरे गैंग के मेंबरों से यहां संपर्क करना भी असंभव है। दूसरी ओर, बाबा के वकील ने कोर्ट में दावा किया कि जेल-2 में ही उसके प्रतिद्वंद्वी गैंग के मेंबर मौजूद हैं।
- इसलिए वहां उसकी जान को गंभीर खतरा है। जेल अफसरों ने सेशन कोर्ट के 12 अगस्त के ऑर्डर का पालन नहीं किया, जिसमें बगैर उसे सूचना दिए जेल नहीं बदलने को कहा गया था।
- इसके बावजूद 24 अगस्त को बाबा को सेंट्रल जेल-1 से सेंट्रल जेल-2 में भेज दिया गया।
- यही वजह रही कि निचली अदालत ने 7 सितंबर को सेंट्रल जेल-2 से किसी दूसरी जेल में भेजने का निर्देश दिया था।
जेल तय कौन करेगा?
सरकारी वकील ने कहा कि सुरक्षा, कैदी को कहां रखा जाए, यह जेल के लेआउट, तकनीकी व्यवस्था और अन्य विशेषज्ञ पहलुओं से जुड़ा मामला है। इसलिए फैसला जेल प्रशासन पर छोड़ा जाना चाहिए। सेशन कोर्ट को सीधे दखल देने का अधिकार नहीं। फैसले को चुनौती देनी है तो हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट ही न्यायिक समीक्षा कर सकते हैं।
