
संवाददाता ( आदर्श सिंह )
लाजपत नगर: रियल एस्टेट कंपनी के सेल्स मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल पिस्टल बरामद कर ली है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपियों ने पिस्टल को गुड़गांव के एक नाले में फेंक दिया था। पुलिस ने इसे बरामद कर लिया है और अब हथियार की फॉरेंसिक जांच के साथ यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसे कहां से लिया गया था। हालांकि, पिस्टल की बरामदगी के बावजूद हत्या की असली वजह अभी भी साफ नहीं हो पाई है।
जांच में युवराज और आरोपियों के बीच करोड़ों रुपये के कथित विवाद की बात सामने आई थी। लेकिन पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आरोपी महिला के लगातार बदलते बयान हैं। पूछताछ में सामने आ रही अलग-अलग कहानियों को पुलिस अब उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों से मिलाकर देख रही है।
तीन दावे, एक मामला, पुलिस खंगाल रही हर एंगल
- जांच से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, आरोपी पक्ष की ओर से पूछताछ में अलग-अलग दावे किए गए हैं।
- एक बयान में कहा गया कि आरोपियों को युवराज से करोड़ों रुपये लेने थे। दूसरे बयान में इसके उलट दावा किया गया कि रकम आरोपियों को युवराज को देनी थी।
- तीसरे बयान में आरोपियों ने दावा किया कि युवराज उन्हें धमकी देता था कि वह उनके पुराने मामलों को उजागर कर देगा।
- पुलिस इन तीनों दावों को अलग-अलग एंगल मानकर जांच कर रही है।
- जांच अधिकारी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इनमें से कौन-सा दावा घटनाक्रम और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों से मेल खाता है।
बदलते बयानों ने पुलिस की मुश्किल बढ़ाई
पैसे का विवाद या कोई और वजह?? पुलिस अब युवराज और आरोपियों के बीच हुए कथित आर्थिक लेनदेन की कड़ियां खंगाल रही है। बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल, चैट और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच के साथ यह भी देखा जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच पहले किस तरह का संपर्क था। पुलिस का फोकस यह पता लगाने पर है कि हत्या से पहले कोई विवाद, धमकी या पैसों को लेकर दबाव की स्थिति बनी थी या नहीं।
